This is default featured slide 1 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 2 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 3 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 4 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 5 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

इस ब्लाग परिवार के हमारे सदस्य साथी....

गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

हरियाली का महत्व स्वयं देखें...


          इन तस्वीरों को देखकर आपको पेड़ों का महत्व समझ में आ पायेगा... 


                  पर्यावरण को बचाने में अपना अधिक से अधिक योगदान दें । पेडों को नष्ट न करें और यदि कहीं इन्हें किसी के द्वारा नष्ट  होता देखें तो  न सिर्फ वहाँ भरसक विरोध करें बल्कि नई वनस्पति को बढाने में अपना हरसंभव योगदान अवश्य दें ।

शनिवार, 14 अप्रैल 2018

लस्सी



          लस्सी का ऑर्डर देकर हम सब आराम से बैठकर एक दूसरे की खिंचाई और हंसी-मजाक में लगे ही थे कि एक लगभग 70-75 साल की माताजी कुछ पैसे मांगते हुए मेरे सामने हाथ फैलाकर खड़ी हो गईं....!

          उनकी कमर झुकी हुई थी,. चेहरे की झुर्रियों में भूख तैर रही थी... आंखें भीतर को धंसी हुई किन्तु सजल थीं... उनको देखकर मन मे न जाने क्या आया कि मैने जेब मे सिक्के निकालने के लिए डाला हुआ हाथ वापस खींचते हुए उनसे पूछ लिया......

          "दादी लस्सी पियोगी ?"

          मेरी इस बात पर दादी कम अचंभित हुईं और मेरे मित्र अधिक... क्योंकि अगर मैं उनको पैसे देता तो बस 2 या 5 रुपए ही देता लेकिन लस्सी तो 35 रुपए की एक है... इसलिए लस्सी पिलाने से मेरे गरीब हो जाने की और उस बूढ़ी दादी के द्वारा मुझे ठग कर अमीर हो जाने की संभावना बहुत अधिक बढ़ गई थी!

          दादी ने सकुचाते हुए हामी भरी और अपने पास जो मांग कर जमा किए हुए 6-7 रुपए थे वो अपने कांपते हाथों से मेरी ओर बढ़ाए... मुझे कुछ समझ नही आया तो मैने उनसे पूछा...

          "ये किस लिए?"

          "इनको मिलाकर मेरी लस्सी के पैसे चुका देना बाबूजी !"

          भावुक तो मैं उनको देखकर ही हो गया था... रही बची कसर उनकी इस बात ने पूरी कर दी!

          एकाएक मेरी आंखें छलछला आईं और भरभराए हुए गले से मैने दुकान वाले से एक लस्सी बढ़ाने को कहा... उन्होने अपने पैसे वापस मुट्ठी मे बंद कर लिए और पास ही जमीन पर बैठ गईं...

          अब मुझे अपनी लाचारी का अनुभव हुआ क्योंकि मैं वहां पर मौजूद दुकानदार, अपने दोस्तों और कई अन्य ग्राहकों की वजह से उनको कुर्सी पर बैठने के लिए नहीं कह सका !

          डर था कि कहीं कोई टोक ना दे.....कहीं किसी को एक भीख मांगने वाली बूढ़ी महिला के उनके बराबर में बिठाए जाने पर आपत्ति न हो जाये... लेकिन वो कुर्सी जिसपर मैं बैठा था मुझे काट रही थी......

          लस्सी कुल्लड़ों मे भरकर हम सब मित्रों और बूढ़ी दादी के हाथों मे आते ही मैं अपना कुल्लड़ पकड़कर दादी के पास ही जमीन पर बैठ गया क्योंकि ऐसा करने के लिए तो मैं स्वतंत्र था... इससे किसी को  आपत्ति नही हो सकती थी... हां ! मेरे दोस्तों ने मुझे एक पल को घूरा... लेकिन वो कुछ कहते उससे पहले ही दुकान के मालिक ने आगे बढ़कर दादी को उठाकर कुर्सी पर बैठा दिया और मेरी ओर मुस्कुराते हुए हाथ जोड़कर कहा.......

          "ऊपर बैठ जाइए साहब ! मेरे यहां ग्राहक तो बहुत आते हैं किन्तु इंसान कभी-कभार ही आता है"

          अब सबके हाथों मे लस्सी के कुल्लड़ और होठों पर सहज मुस्कुराहट थी, बस एक वो दादी ही थीं जिनकी आंखों मे तृप्ति के आंसूं... होंठों पर मलाई के कुछ अंश और दिल में सैकड़ों दुआएं थीं!

          न जानें क्यों जब कभी हमें 10-20-50 रुपए किसी भूखे गरीब को देने या उसपर खर्च करने होते हैं तो वो हमें बहुत ज्यादा लगते हैं लेकिन सोचिए कि क्या वो चंद रुपए किसी के मन को तृप्त करने से अधिक कीमती हैं?

          दोस्तों... जब कभी अवसर मिले ऐसे दयापूर्ण और करुणामय काम करते रहें भले ही कोई अभी आपका साथ दे या ना दे , समर्थन करे ना करें... सच मानिए इससे आपको जो आत्मिक सुख मिलेगा वह अमूल्य है ।

गुरुवार, 12 अप्रैल 2018

ऐसे भी समझें "शराब" को...!


          नशे का आदी बना देने वाली शराब जिसकी गिरफ्त में फँसकर देश की एक बडी जनसंख्या अपने धन, स्वास्थ्य व सामाजिक प्रतिष्ठा का निरन्तर नुकसान उठाकर भी मृत्युपर्यंत इसके मकडजाल से बाहर नहीं निकल पाती है, इसके नाम में ही इसकी छुपी हुई इसकी विषाक्तता को यूं भी देखें...

शराब का मतलब...

- शत प्रतिशत
रा - राक्षसों जैसा
- बना देने वाला पेय । 



            और क्या कहते हैं शराब को - मदिरा 

            - मरघट
            दि - दिखाने वाला
            रा - रास्ता


                    शराब को दारू  भी कहते हैं

                    दा - दांव पर
                    रू  - रूह




                              शराब को English में कहते हैं Wine

                              W - Wisdom (ज्ञान)
                               I  -  Income (आमदनी)
                               N - Nature (गुण)
                               E - End (समाप्त)

            
           इसलिए ऐसी विषरुपी शराब से जितना भी बचकर रह सकें उतना अवश्य बचें और अपनी जिंदगी की सार्मथ्य, सम्मान, स्वास्थ्य और सम्पदा को बचाते हुए सुखपूर्वक जीवन गुजारने का प्रयास अवश्य करें ।

मंगलवार, 10 अप्रैल 2018

प्रेमिका बनाम पत्नी


             एक व्यक्ति ने बुलेट 350सीसी मोटरसायकल खरीदी जिससे कि वो अपनी गर्लफ्रेंड को लॉन्गड्राइव पर घुमाने ले जा सके लेकिन बुलेट 350सीसी की तेज़ आवाज़ के कारण ड्राइविंग करते समय वो अपनी गर्लफ्रेंड से बात नही कर पता था, आखिर तंग आ कर उसने अपनी बुलेट 350सीसी जिसे उसने बड़े ही अरमानो से खरीदा था, बमुश्किल एक महीने के भीतर ही नुकसान उठाकर बेच दी और एक नई एक्टिवा खरीद ली ।

          अब वो बहुत खुश था, उसकी लवलाइफ बहुत ही अच्छी चल रही थी, लॉन्गड्राइव पर जाने में उसे अब बहुत ही मज़ा आने लगा था क्योंकि नई एक्टिवा उस बुलेट 350सीसी की तरह तेज़ आवाज़ नही करती थी और वो बड़े ही आराम से ड्राइविंग करते हुए अपनी प्यारी गर्लफ्रेंड से बातें कर पाता था ।

          दोनों के दिन बड़े ही अच्छे से कट रहे थे, वक्त मनो पंख लगा कर उड़ता रहा । देखते ही देखते दो वर्ष कब बीत गये दोनों को पता ही न चला । बहुत प्यार था उन दोनों को एक दूजे से, दोनों ने साथ-साथ जीने मरने की कसमें खाईं ।

          आदमी अच्छाखासा कमाता था, गर्लफ्रेंड में भी कोई कमी न थी अत: घरवालों को राज़ी कर दोनों ने शादी कर ली ।

          अब वक्त और तेज़ी से गुज़रा, एक साल बाद उसी आदमी ने वापस एक्टिवा बेच कर इस बार बुलेट 500सीसी खरीद ली..!
 
          ( वजह हर विवाहित व्यक्ति जानता है ।)


सोमवार, 2 अप्रैल 2018

बावरे मुहावरे


हिंदी के मुहावरे, बड़े ही बावरे हैं,
खाने पीने की चीजों से भरे हैं....
कहीं पर फल है, तो कहीं आटा दालें हैं ,
कहीं पर मिठाई है, कहीं पर मसाले हैं ,
फलों की ही बात ले लो....
 
आम के आम और गुठलियों के भी दाम मिलते हैं,
कभी अंगूर खट्टे हैं,
कभी खरबूजे, खरबूजे को देख कर रंग बदलते हैं,
कहीं दाल में काला है,
तो कहीं किसी की दाल ही नहीं गलती,
कोई डेढ चावल की खिचड़ी पकाता है,
तो कोई लोहे के चने चबाता है,
कोई घर बैठा रोटियां तोड़ता है,
कोई दाल भात में मूसरचंद बन जाता है,
मुफलिसी में जब आटा गीला होता है ,
तो आटे दाल का भाव मालूम पड़ जाता है,
सफलता के लिए बेलने पड़ते है कई पापड़,
आटे में नमक तो जाता है चल,
पर गेंहू के साथ, घुन भी पिस जाता है,
अपना हाल तो बेहाल है, ये मुंह और मसूर की दाल है,
गुड़ खाते हैं और गुलगुले से परहेज करते हैं,
और कभी गुड़ का गोबर कर बैठते हैं,
कभी तिल का ताड़, कभी राई का पहाड़ बनता है,
कभी ऊँट के मुंह में जीरा है ,
कभी कोई जले पर नमक छिड़कता है,
किसी के दांत दूध के हैं ,
तो कई दूध के धुले हैं,
कोई जामुन के रंग सी चमड़ी पा के रोई है,
तो किसी की चमड़ी जैसे मैदे की लोई है,
किसी को छटी का दूध याद आ जाता है ,
दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक पीता है ,
और दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता है ,
शादी बूरे के लड्डू हैं , जिसने खाए वो भी पछताए,
और जिसने नहीं खाए, वो भी पछताते हैं,
पर शादी की बात सुन, मन में लड्डू फूटते है ,
और शादी के बाद, दोनों हाथों में लड्डू आते हैं,
कोई जलेबी की तरह सीधा है, कोई टेढ़ी खीर है,
किसी के मुंह में घी शक्कर है, सबकी अपनी अपनी तकदीर है...
कभी कोई चाय पानी करवाता है,
कोई मख्खन लगाता है
और जब छप्पर फाड़ कर कुछ मिलता है ,
तो सभी के मुंह में पानी आता है,
भाई साहब अब कुछ भी हो ,
घी तो खिचड़ी में ही जाता है,

जितने मुंह है, उतनी बातें हैं,
सब अपनी अपनी बीन बजाते है,
पर नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुनता है ,
सभी बहरे है, बावरें है
ये सब हिंदी के मुहावरें हैं     


Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...